हाइकु
क्षणों में सिमटा जीवन
48 रचनाएँ
2014
जनवरी
हाइकु
ये जीवन के रंग
बदले रंग जीवन सतरंगी ये पगडण्डी । साँसो की लय थिर मन मयूर दे नये रंग। शब्द गुलाल…
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हाइकु
झूमें ज़िन्दगी
फूल बनके खिली, जूही की कली महकी फिज़ा । झोंका हवा का छू कर, यूँ गया कि झूमें…
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हाइकु
वसन्त
प्रसन्न मन प्रफुल्लित है तन, आया वसन्त। मन के तार बिना साज के राग छाया वसन्त महके फूल…
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हाइकु
नव वर्ष-2014
1 कुछ खट्टा ये कुछ मीठा बीता है गया वर्ष रे। 2 हर्षित मन नई उम्मीदों -संग भरेगा…
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हाइकु
कांपी धरती
कांपी धरती पिघला आसमान मूक इंसान। टूटा घरौंदा बिखरा है सामान कैसी पहचान। रौंदी धरती भूले हैं परिणाम…
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हाइकु
युगों युगों से
दुख बादल सुख उड़ता पंछी यात्रा अनंत। युगों युगों से ढूढ़ता मुसाफिर कहॉं मंजिल। दुखी रहना प्रवृत्ति है…
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हाइकु
उनींदी आँखें
भावों का रेला किसने क्या-क्या ठेला वक्त ने कहा। गीत -संगीत बजाते गए मीत नयी दिशा में। उनींदी…
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