हाइकु
पूर्णता की ओर
तन की नहीं, मन की शक्ति के ही ये हैं पुजारी। दया न माँगे, न सहानुभूति हीं, दे…
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क्षणों में सिमटा जीवन
48 रचनाएँ
तन की नहीं, मन की शक्ति के ही ये हैं पुजारी। दया न माँगे, न सहानुभूति हीं, दे…
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देखो आईना करो सवाल, क्यों है ये भ्रष्टाचार। शब्दों से नहीं पाटी जाए बीमारी ये लाइलाज। वायरस ये…
रचना पढ़ें : भ्रष्टाचार
यशोदा कहो, या पुकारो देवकी इक रूप -सी । है कभी ढाल, कभी तलवार उर विशाल । ममता–…
रचना पढ़ें : ममता
बीती ये,उम्र इस इंतजार में मिलेगा प्यार। क्यों प्रतिपल, अनहोनी का डर है उम्र भर। वो मनमीत अधूरे…
रचना पढ़ें : जिन्दगी की बातें
संवेदना-सी जमी, सर्दी की शामें ढूंढती आंच । खोजते,इक टुकड़ा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना…
रचना पढ़ें : सर्दी
पचास पार पनपे ये इंतजार क्या होगा यार। धूप आंगना होगा अब आराम आया विराम । वो घड़ी…
रचना पढ़ें : रिटायरमेंट
माँ ! माई! मम्मी बिटिया पुकारती मैं इठलाती । है घर द्वार बजती शहनाई ये रानी आई। तेरे…
रचना पढ़ें : बिटिया
1 खामोश बोलें ये राज हर खोलें बोलती आंखें । 2 नैनों की भाषा है अजब पहेली बूझ…
रचना पढ़ें : आंखे