हाइकु
धूप के पाँव
हर दिशा में मृग मरिचिकाऍं कैसे बचाएँ । 2 शुष्क रिश्तों-सी मुरझाई लताएँ खोजें आर्द्रता। 3 जल -अभाव…
रचना पढ़ें : धूप के पाँव
क्षणों में सिमटा जीवन
48 रचनाएँ
हर दिशा में मृग मरिचिकाऍं कैसे बचाएँ । 2 शुष्क रिश्तों-सी मुरझाई लताएँ खोजें आर्द्रता। 3 जल -अभाव…
रचना पढ़ें : धूप के पाँव
मन का पंछी पाने को पहचान भरे उड़ान । मन है देता जीवन आधार मंत्र अपार। मन की…
रचना पढ़ें : मन के द्वार
यादें मृदुल हर दर्द मिटा दें दे के संबल । जीवन बीता तेरी यादों के संग यूं भी…
रचना पढ़ें : हाइकु
है होली आई फागुनी पुरवाई ये मस्ती छाई। है राधा संग बरसाने के रंग कान्हा मलंग। ले पिचकारी…
रचना पढ़ें : होली आई रे !
है होली आई फागुनी पुरवाई ये मस्ती छाई। है राधा संग बरसाने के रंग कान्हा मलंग। ले पिचकारी…
रचना पढ़ें : होली आई रे !
यशोदा कहो, या पुकारो देवकी इक रूप -सी । है कभी ढाल, कभी तलवार उर विशाल । ममता…
रचना पढ़ें : ममता
सर्दी की शामें संवेदना-सी जमी ढूँढती आँच । खोजते रहे टूटा-सा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना…
रचना पढ़ें : सर्दी
1 कुछ खट्टा ये कुछ मीठा बीता है गया वर्ष रे। 2 हर्षित मन नई उम्मीदों -संग भरेगा…
रचना पढ़ें : नव वर्ष